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अयोध्या विवाद में SC का अहम फैसला- विवादित जमीन की निगरानी के लिए रखें ऑब्जर्वर

लखनऊ, 

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट को आदेश दिए कि वो 10 दिन में दो एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज अप्वॉइंट करे जो इस विवादित जमीन की निगरानी में ऑब्जर्वर की भूमिका निभाएंगे।

इस संबंध में इलाहबाद हाईकोर्ट रजिस्ट्री के तरफ से पेश हुए वकील राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभी जो ऑब्जर्वर हैं, उनमें से एक रिटायर हो चुके हैं जबकि दूसरे को हाईकोर्ट में जज बना दिया गया है। राकेश ने सुप्रीम कोर्ट को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज और स्पेशल जज की एक लिस्ट भी सौंपी। राकेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इन नामों में से किसी को ऑब्जर्वर बनाने पर विचार कर सकता है।

सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा,जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की बेंच ने कहा आपने जो लिस्ट दी है, वो काफी लंबी है। बेहतर होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ही एडिशनल डिस्ट्रिक्ट या स्पेशल जजों में से किन्हीं दो 10 दिन के अंदर ऑब्जर्वर के तौर पर अप्वॉइंट कर दें।

हालांकि सुनवाई के दौरान एक पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है। टीएम. खान और एसके. सिंह 2003 से इस मामले में ऑब्जर्वर हैं। वो ही अब तक इसे देख रहे हैं। जब वो 14 साल से ये काम कर रहे हैं तो उन्हें क्यों बदला जा रहा है? इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि उनमें से एक के पास अब यह पोस्ट नहीं है। लिहाजा, वो इस काम को जारी नहीं रख सकते। इसलिए, हमने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस पर फैसला लेने के लिए कहा है।

बता दें कि हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर विवादित बाबरी ढांचा बना था। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचा गिरा दिया गया था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था।

कई सालों तक केस चलने के बाद 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर मुद्दे पर अपना फैसला सुनाते हुए अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। बेंच ने तय किया था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अयोध्या की विवादित जमीन पर दावा जताते हुए रामलला विराजमान की तरफ से हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की। दूसरी तरफ, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद कई और पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन्स दायर कर दी। इन सभी पिटीशन्स पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। तब से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

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